विनायक चतुर्थी (गणेश चतुर्थी) हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को मनाई जाती है। ये त्योहार बुद्धि, सौभाग्य और नए काम की शुरुआत के लिए माना जाता है। अगर आप इस बार घर पर शांत और सस्ता तरीके से मनाना चाहते हैं, तो यहाँ सीधी और काम की जानकारी मिलेगी — पूजा कैसे करें, क्या चढ़ाएं, और कैसे इको‑फ्रेंडली तरीके अपनाएं।
पौराणिक मत के अनुसार भगवान गणेश को नई शुरुआत और बाधा नाशक माना जाता है। तिथि हर साल पंडितानुसार बदलती है, इसलिए स्थानीय पंचांग या मंदिर से सही दिन और समय जरूर जाँच लें। पारंपरिक रूप से परिवार नए काम या यात्रा से पहले गणपति की पूजा करते हैं ताकि काम में सफलता और बाधा नाश हो।
पूजा करना चाहते हैं पर समय कम है? यह सरल तरीका अपनाएँ:
1) स्थान तय करें: घर में साफ और स्थिर जगह चुनें, जहां मूर्ति आराम से रखी जा सके।
2) मूर्ति/इमेज: छोटे‑मध्यम आकार की इको‑फ्रेंडली मूर्ति लें — क्ले या पल्प‑मेटेरियल बेहतर।
3) साफ‑सफाई और सजावट: फूल, दीप और थोड़ी हल्की लाइटिंग रखें।
4) पूजा‑सामग्री: अक्षत (चावल), रोली‑कुमकुम, कतरा या अगरबत्ती, मोदक या फल‑नैवेद्य रखें।
5) अर्चना: ॐ गं गणपतये नमः का 108 बार जाप करने की जरूरत नहीं — दिल से 3–11 बार कहते हुए आरंभ कर दें। छोटे बच्चों से भी सरल मंत्र करवा लें।
6) आशीर्वाद और प्रसाद वितरण: परिवार के साथ प्रसाद बाँटें और जरूरत हो तो पड़ोसियों को भी दें।
फास्टिंग करनी हो तो हल्का उपवास रखें—फल, नारियल या एक हल्का भोजन इच्छानुसार। कई लोग एक दिवसीय व्रत रखते हैं, पर स्वास्थ्य अनुसार निर्णय लें।
विनायक चतुर्थी में मोदक प्रिय प्रसाद है। तैयार करना आसान है: भाप में भीगे चावल के आटे या गेहूँ के आटे की खोली बनाकर अंदर गुड़ और नारियल का मिश्रण भरें। अगर समय कम हो तो फल भी अच्छा विकल्प है।
विसर्जन और इको‑फ्रेंडली विकल्प: पारंपरिक रूप से गणपति की मूर्ति पानी में विसर्जित की जाती है। पर अब इको‑फ्रेंडली मूर्तियाँ, पल्प‑मेटेरियल वाले मॉडल या घर में ही विसर्जन (छोटे कटोरे में पानी) का विकल्प चुनना बढ़िया है। सार्वजनिक स्थल पर विसर्जन करते समय स्थानीय नियम और स्वच्छता का पालन करें।
सुरक्षा और शिष्टाचार: बिजली के कनेक्शन, मोमबत्ती व पटाखों से सावधानी रखें। बड़े शोभायात्रा में मार्ग को साफ रखें और सरकारी निर्देशों का पालन करें।
अंत में, उत्सव का असली मतलब है मिलन, विनम्रता और नई शुरुआत का भरोसा। छोटे‑छोटे कदम — इको‑फ्रेंडली मूर्ति, कम व्यर्थ खर्च और शांत पूजा — त्योहार को टिकाऊ और सुखद बनाते हैं। शुभ विनायक चतुर्थी!
जनवरी 2025 में विनायक चतुर्थी शुक्रवार, 3 जनवरी को मनाई जाएगी। यह दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा को समर्पित है। भक्तगण इस दिन प्रातः काल से संध्या तक उपवास रखते हैं और विधिपूर्वक भगवान गणपति की पूजा करते हैं। पूजा की शुरुआत प्रातः स्नान कर घर को शुद्ध करके की जाती है। भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पुष्पमाला से सजाकर दीप जलाकर पूजा की जाती है।