अगर आप घर पर नियमित पूजा करना चाहते हैं पर सही तरीका समझ नहीं आता, तो यह पेज आपकी मदद करेगा। नीचे दी गई पूजा विधि सरल है—समय, सामग्री, चरण और कुछ उपयोगी सुझाव मिलाकर। हर वाक्य का मकसद आपको तुरंत लागू करने के काबिल तरीका देना है।
सबसे पहले जगह साफ़ करें। मंदिर या छोटा अलमारी का भाग कपड़े से पोंछकर सजाएँ। सुबह का समय (ब्रेकफास्ट से पहले) और संध्या (सूर्यास्त के बाद) सबसे बेहतर माना जाता है। अगर आप किसी विशेष मुहूर्त पर पूजा कर रहे हैं तो पंचांग या मंदिर से समय देख लें।
आवश्यक सामग्री की सूची छोटी रखें: एक दीपक (घी या तेल), अगरबत्ती/धूप, पुष्प (फूल), तिलक के लिए रोली/कुंकुम, नैवेद्य (फल या मीठा), जल के लिए कलश या गिलास, दीपक जलाने के लिए मांछिल या लाइटर, और अगर संभव हो तो छोटी थाली में अक्षत (चावल)।
1) स्वच्छता और ध्यान: हाथ-पैर धोकर साफ कपड़े पहनें। 2-3 गहरी सांस लें और मन को शांत करें।
2) स्थापना और संकल्प: प्रतिमा या फोटो को साफ जगह पर रखें। आप छोटी प्रणय कर सकते हैं—किसकी पूजा कर रहे हैं, क्यों कर रहे हैं यह मन में बताएं।
3) तिलक और दीपक: माथे पर हल्का तिलक लगाएँ और दीपक जलाएँ। दीपक को दाहिनी ओर रखें और उसे तीन बार सर्कल में घुमा कर भगवान को अर्पित करें।
4) अर्पण: फूल, धूप और नैवेद्य क्रम से अर्पित करें। हर अर्पण के साथ छोटे-छोटे शब्दों में धन्यवाद कहें या मन ही मन मनोकामना कहें।
5) मंत्र उचारण: सरल और प्रभावी मंत्रों का प्रयोग करें—शुभ शुरुआत के लिए "ॐ श्री गणेशाय नमः" और अन्य देities के लिए उनके सामान्य मंत्र। यदि आप शिव की पूजा कर रहे हैं तो "ॐ नमः शिवाय" बोलें। मंत्रों की संख्या कम रखें और मन लगाकर जप करें।
6) प्रार्थना और ध्यान: 3-5 मिनट का मौन ध्यान रखें। अपने परिवार व स्वास्थ्य, काम और मन की शांति के लिए मन से प्रार्थना करें।
7) समापन: आरती करें या आरती का ऑडियो/वीडियो चला लें। आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करें और परिवार के साथ बांटें।
8) साफ-सफाई: पूजा के बाद स्थान को साफ रखें और जल को बाहर निकाल दें या पौधे को दे दें।
टिप्स: रोज़ाना समय एक जैसा रखने से अनुशासन बनता है। अगर आप व्यस्त हैं तो 5-7 मिनट की छोटी पूजा भी रोज़ लाभ देती है। बच्चों को छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ दें—फूल रखना, दीपक बुझाना—इससे वे पारंपरिक ज्ञान सीखते हैं।
अंत में, पूजा का मकसद नियम-कायदे से नहीं बल्कि मन की सच्ची श्रद्धा से जुड़ा हुआ होना चाहिए। विधि अपनाएँ, पर मन में यथार्थ भावना रखें। अगर आप किसी त्योहार या विशेष अनुष्ठान के लिए तैयारियों में हैं, तो उस दिन की विशेष सामग्री और मुहूर्त अलग होंगे—वो अलग निर्देशों में देखें या मंदिर से पूछ लें।
जनवरी 2025 में विनायक चतुर्थी शुक्रवार, 3 जनवरी को मनाई जाएगी। यह दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा को समर्पित है। भक्तगण इस दिन प्रातः काल से संध्या तक उपवास रखते हैं और विधिपूर्वक भगवान गणपति की पूजा करते हैं। पूजा की शुरुआत प्रातः स्नान कर घर को शुद्ध करके की जाती है। भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पुष्पमाला से सजाकर दीप जलाकर पूजा की जाती है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2024 का उत्सव 6 जुलाई से शुरू होकर 15 जुलाई तक चलेगा। यह गुप्त नवरात्रि विशेषतः गुप्त साधनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और देवी की कृपा प्राप्ति का माध्यम बनती है। कलशस्थापना का शुभ मुहूर्त 6 जुलाई की सुबह 5:29 बजे से 10:07 बजे तक है।