पास प्रतिशत यानी उस परीक्षा में पास हुए छात्रों का कुल छात्रों के मुकाबले प्रतिशत। इसे देखकर बोर्ड, स्कूल या जिले का शैक्षिक प्रदर्शन समझा जाता है। हाल ही में राजस्थान बोर्ड (RBSE) 10वीं का रिजल्ट 2025 घोषित हुआ जिसमें पास प्रतिशत 93.60% रहा — ये एक साफ उदाहरण है कि कैसे आंकड़े बड़ी तस्वीर दिखाते हैं।
गणना सीधी है: (पास हुए छात्र ÷ कुल पहुँचने वाले छात्र) × 100 = पास प्रतिशत। उदाहरण: अगर 10,00,000 में से 9,36,000 छात्र पास हुए तो पास प्रतिशत 93.60% होगा। बोर्ड अक्सर जिलेवार, लिंगवार और स्कूल-वार आँकड़े भी जारी करते हैं ताकि कमजोर क्षेत्रों की पहचान हो सके।
रिजल्ट चेक करने के सामान्य तरीके:
कम पास प्रतिशत का मतलब सिर्फ एक साल की कमी नहीं, बल्कि कई कारण हो सकते हैं — परीक्षा पैटर्न, तैयारी स्तर, संसाधनों की कमी। छात्र या अभिभावक क्या कर सकते हैं:
छात्रों के लिए रोज़ाना छोटे-छोटे लक्ष्य रखें, समय सारिणी बनाएं और साप्ताहिक टेस्ट दें। अभिभावक प्रयोगशाला या इंटरनेट की मदद से पढाई में सहयोग कर सकते हैं। संस्थागत सुधार के लिए स्कूल-स्तर पर अतिरिक्त क्लास और शिक्षक प्रशिक्षण जरूरी होते हैं।
पास प्रतिशत सिर्फ एक नंबर नहीं है — यह बताता है कि किन जगहों पर सुधार की ज़रूरत है और कहाँ तरक्की हो रही है। अगर आप रिजल्ट से जुड़ी ताज़ा खबरें देखना चाहते हैं तो हमारे सेक्शन में RBSE, CBSE जैसे रिपोर्ट और टॉपर अपडेट मिलते हैं — उदाहरण के लिए CBSE 2025 में कई टॉपर्स ने 99% जैसे हाई स्कोर हासिल किए। ऐसे आँकड़े पढ़कर तैयारी की रणनीति बनाना आसान है।
कोई भी शंका हो तो बोर्ड की आधिकारिक नोटिस पढ़ें या अपने स्कूल से संपर्क करें — छोटे कदम अक्सर बड़े बदलाव लाते हैं।
हरियाणा बोर्ड ने 95.22% उत्तीर्ण प्रतिशत के साथ कक्षा 10 का परिणाम घोषित किया है। विद्यार्थी bseh.org.in पर रोल नंबर द्वारा परिणाम देख सकते हैं। इस वर्ष परीक्षा में लगभग 2.8 लाख विद्यार्थियों ने भाग लिया था।