क्या आप अपने बोर्ड या किसी परीक्षा का "पास प्रतिशत" देखकर उलझन में हैं? आप अकेले नहीं हैं। पास प्रतिशत अक्सर रिजल्ट के साथ छपा रहता है और छात्र-परिवार यही जानना चाहते हैं कि ये संख्या सचमुच क्या बताती है। यहाँ आसान भाषा में सब कुछ बताया गया है ताकि आप समझकर सही कदम उठा सकें।
सबसे पहले, पास प्रतिशत का मतलब साफ करें: यह उस परीक्षा में पास होने वाले छात्रों का कुल संख्या के मुकाबले प्रतिशत होता है। उदाहरण: अगर 1000 छात्रों में 850 पास हुए तो पास प्रतिशत होगा 85%। यह संख्या स्कूल, बोर्ड या विश्वविद्यालय स्तर पर अलग-अलग निकाली जा सकती है।
गणना सरल है—(पास छात्र / कुल उपस्थित छात्र) × 100। पर ध्यान दें कि कुछ बोर्ड 'उपस्थित' और 'रजिस्ट्र किए हुए' छात्रों के आधार पर अलग निकालते हैं। इसलिए रिपोर्ट पढ़ते समय देखिए कि बेसलाइन क्या है।
किसी रिजल्ट पेज पर ये चीजें चेक करें:
उदाहरण के तौर पर CBSE जैसे बोर्ड में पासिंग मार्क्स और ग्रेडिंग सिस्टम अलग हो सकते हैं। कुछ बोर्डों में मॉडरेशन या ग्रेस मार्क्स भी दिए जाते हैं, जो पास प्रतिशत को प्रभावित करते हैं।
रिजल्ट आते ही हड़बड़ी न करें। नीचे दिए कदम फॉलो करें:
एक छोटी सलाह: रिजल्ट को अकेले अंक समझें, अपनी क्षमता नहीं। पास प्रतिशत सिस्टम बड़े डेटा का औसत बताता है, पर आपकी तैयारी और आगे की राह उसके बाहर भी तय होती है।
अगर आप नियमित रूप से बोर्ड या सरकारी रिजल्ट देखते हैं तो आधिकारिक वेबसाइट, नोटिस बोर्ड और समाचार पोर्टल पर अपडेट रखें। और हाँ, कभी-कभी खबरों में पास प्रतिशत को मोटा-चोटा दिखाया जाता है—हमेशा आधिकारिक रिपोर्ट देख कर विश्वास करें।
कोई खास प्रश्न है—जैसे किसी बोर्ड का पास प्रतिशत, री-चेक कैसे कराएं या कंपार्टमेंट फीस कितनी होती है? नीचे दिए गए कमेंट सेक्शन में बताइए, हम आसान भाषा में स्टेप-बाय-स्टेप मदद करेंगे।
राजस्थान बोर्ड (RBSE) 10वीं कक्षा का रिजल्ट 2025 में 93.60% पास प्रतिशत के साथ घोषित हुआ है। 10 लाख से ज्यादा छात्रों ने परीक्षा दी थी। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में टॉपर्स के नाम और जिले अनुसार आंकड़े जारी किए। रिजल्ट वेबसाइट, डिजीलॉकर व अन्य पोर्टल्स पर उपलब्ध है।