मुद्रास्फीति: क्या है और आपकी जेब पर कैसे असर करती है?

मुद्रास्फीति का मतलब है पैसे की क्रय शक्ति का घट जाना — यानी आज जो चीज़ 100 रुपये में मिलती है, कल उसके लिए आपको ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। इसे आमतौर पर CPI (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) और WPI से नापा जाता है। सीधा असर रोज़मर्रा की चीज़ों पर दिखता है: खाने-पीने, ईंधन और बिजली की कीमत बढ़ती है।

मुद्रास्फीति क्यों होती है?

कुछ आसान कारण हैं जिनसे महंगाई बढ़ती है। पहले, मांग-खपत अचानक बढ़ जाए तो कीमतें ऊपर जाती हैं (demand-pull)। दूसरा, कच्चे माल या ईंधन के दाम बढ़ें तो उत्पादन महंगा होता है और वो लागत उपभोक्ता तक जाती है (cost-push)। तीसरा, मौसम या सप्लाई चेन में रुकावट से खाद्य या इंधन की उपलब्धता घटे तो कीमतें कूदती हैं। चौथा, बैंक और सरकार की नीतियाँ — जब बाज़ार में पैसा ज्यादा होता है तो कीमतें दबाव में आती हैं।

इनमें से कई कारण एक साथ काम कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, तेल महंगा हुआ तो ट्रांसपोर्ट, खाद्य और फैक्ट्री सभी पर असर पड़ेगा।

मुद्रास्फीति का असर — आपको क्या महसूस होगा?

सैलरी वही रहे पर सामान महंगा हो जाए तो जीवनस्तर घट जाता है। बचत की वास्तविक वैल्यू गिरती है — बैंक में रखा पैसा कम खरीद पाएगा। रिटायर्ड लोगों के लिए फिक्स्ड इनकम नुकसानदेह होती है। बिज़नेस में कच्चा माल महंगा होने से मुनाफा घटता है। ऊंची मुद्रास्फीति पर RBI नीतियाँ कड़ा कर सकती हैं, जिससे लोन महंगे हो जाते हैं।

लेकिन कुछ लोगों को फायदा भी होता है: कर्ज लेने वाले अगर फिक्स्ड ईएमआई पर हैं, उनकी वास्तविक देनदारी घट सकती है (जब मुद्रास्फीति से आमदनी बढ़े)।

अब सवाल यह है — आप खुद क्या कर सकते हैं?

सबसे पहले, बजट चेक करें। हर महीने जरूरी और गैर-ज़रूरी खर्च अलग रखें। ऐप्स या नोट से ट्रैक रखने पर तुरंत पता लगता है कहाँ कटौती हो सकती है।

दूसरा, अपनी बचत को सजग बनाइए। फिक्स्ड डिपॉज़िट हमेशा सुरक्षित हैं, मगर उच्च मुद्रास्फीति में रिटर्न कम पड़ सकता है। इसलिए निवेश में विविधता रखें: इक्विटी (SIP), गोल्ड, रियल एस्टेट और इन्फ्लेशन-इंडेक्स्ड बॉण्ड्स को विचार में लें। एलआईसी, PPF जैसी योजनाएँ लॉन्ग टर्म सुरक्षा देती हैं, पर रिटर्न देखें।

तीसरा, कुछ तरकीबें जो तुरंत मदद करेंगी: रोज़मर्रा के सामान सस्ते पल पर खरीदें, ऑफ-सीज़न स्टॉक करें, लोकल मंडियों और प्राइस कंपेयर ऐप्स से सस्ती खरीदारी करें।

चौथा, अपनी आय बढ़ाने पर काम करें — स्किल बढ़ाइए, पार्ट-टाइम या फ्रीलांसिंग पर विचार करें। वेतन बढ़ोतरी मांगना और करियर अपग्रेड करना लंबे समय में सबसे असरदार उपाय है।

RBI मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट और मौद्रिक नीति इस्तेमाल करता है। मुद्रा नीति पर नजर रखने से आपको अंदाज़ा होता है कि ब्याज दरें कैसे बदल सकती हैं और किस निवेश का समय सही है।

मुद्रास्फीति रोज़मर्रा की समस्या है, पर समझदारी से फैसले लेकर आप अपनी बचत और खर्च को बेहतर रख सकते हैं। छोटे कदम—बजट, विविध निवेश और आय बढ़ाना—दीर्घकाल में बड़ा फर्क बनाते हैं।

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अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने 29 जनवरी, 2025 को अपनी प्रमुख ब्याज दर को 4.25%-4.50% रेंज में स्थिर रखा। यह निर्णय मुद्रास्फीति की दिशा और नई प्रशासन की आर्थिक नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करते हुए लिया गया। पिछले महीनों में की गई दर वृद्धि के बाद, फेड का यह रुख बाजार में अनिश्चितता ला रहा है। शेयर बाजार ने भी इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी।