क्या आप पूजा के लिए कलशस्थापना करने जा रहे हैं और सीधे, काम की जानकारी चाहते हैं? यह लेख घर पर या मंदिर में बिना उलझन के कलश लगाने का आसान और प्रैक्टिकल तरीका बताता है। हर कदम स्पष्ट है ताकि आप आत्मविश्वास से अनुष्ठान कर सकें।
सबसे पहले जरूरी सामान तैयार कर लें: एक साफ तांबे/कांसे/कांच या मिट्टी का कलश, पानी, गुड़ या चावल, पवित्र धागा (मुला), नारियल, पत्ते (मांगो या बिल्व), रंगोली के लिए हल्दी-कुमकुम, फूल और दीपक। अगर वैदिक तरीके से करना हो तो उसे ध्यान में रखें लेकिन ये सामान सामान्य पूजा के लिए पर्याप्त हैं।
कलश में भरा जाने वाला पानी नोंदी था? हां, वह साधारण सा पानी होता है जो घर में साफ रखा गया हो। अगर संभव हो तो नदी या पवित्र स्रोत का पानी लें, नहीं तो नल का साफ पानी भी चलेगा।
1) कलश की सफाई और स्थानः कलश को अच्छे से धोकर सुखा लें। पूजा स्थल साफ रखें और जमीन पर एक साफ लाल या पीला कपड़ा बिछा लें।
2) कलश में सामग्री रखेंः कलश में पहले थोड़ा चावल या गुड़ डालें ताकि वह पूर्णता और समृद्धि का संकेत दे। फिर कलश में पानी भरें।
3) नारियल और पत्ते रखेंः कलश के मुंह पर नारियल रखें और नारियल के नीचे पत्ते लगाने से कलश स्थिर रहता है। नारियल पर हल्का कुमकुम या चंदन लगाएँ।
4) धागा और सजावटः कलश के गले पर पवित्र धागा बांधें और फूलों से सजाएँ। आप कलश के चारों ओर अक्षत (चावल) छिड़क सकते हैं।
5) मंत्र उच्चारण और आरतीः अगर आप मंत्र जानते हैं तो गोपीकानो अथवा सप्तशति के छोटे मंत्र पढ़ें। सरल रूप में आप "ॐ तुम्मे नमः" या "ॐ श्री कलशाय नमः" जैसी संक्षिप्त ध्वनि कर सकते हैं। अंतिम चरण में दीपक जला कर आरती करें।
टिप: कलशस्थापना के बाद पानी को सुबह सूर्य को अर्ध्य के रूप में दिया जा सकता है या पौधे में डाल दें—बर्बाद न करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: क्या कलश को बार-बार बदलना चाहिए? जवाब: कलश और पानी को हर पूजा के बाद साफ रखना चाहिए। अगर बड़ा पर्व हो तो नया पानी और साफ कलश रखें।
छोटी-छोटी सावधानियाँ: कलश को बांस की सीधी हवा में न रखें, बच्चे या पालतू जानवरों से दूर रखें, और अगर घर में बुजुर्ग हों तो उनकी सहमति से जगा चुनें।
कलशस्थापना ज्यादा जटिल नहीं है। बस सफाई, सामग्री और ईमानदारी से की गई नीयत चाहिए। अब आप तैयार हैं—थोड़ी तैयारी, शांत मन और सही क्रम से आप पूजा को सार्थक बना सकते हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2024 का उत्सव 6 जुलाई से शुरू होकर 15 जुलाई तक चलेगा। यह गुप्त नवरात्रि विशेषतः गुप्त साधनाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है और देवी की कृपा प्राप्ति का माध्यम बनती है। कलशस्थापना का शुभ मुहूर्त 6 जुलाई की सुबह 5:29 बजे से 10:07 बजे तक है।