हाइपरइमेज कैमरा — सरल भाषा में समझें

हाइपरइमेज कैमरा (हाइपरस्पेक्ट्रल/मल्टीस्पेक्ट्रल) ऐसा कैमरा है जो सामान्य फोटो से अलग कई रंगों या तरंगदैर्घ्य पर एक साथ इमेज रिकॉर्ड करता है। मतलब, ये सिर्फ RGB नहीं बल्कि नज़रों के परे के संकेत भी पकड़ते हैं — जैसे पौधों की सेहत, मिट्टी में नमी, या सतह की रासायनिक बनावट। अगर आप खेत, ड्रोन मैपिंग, पर्यावरण निगरानी या इंडस्ट्रियल इंस्पेक्शन करते हैं तो ये कैमरा बेहद काम का है।

सीधा फायदा: यह आपको वह जानकारी देता है जो आंख नहीं देख सकती। उदाहरण के तौर पर, किसी खेत में पत्तियों का एक छोटा बदलाव हरे में नहीं दिखेगा, लेकिन हाइपरइमेज में वो संकेत मिलकर बीमारी या पानी की कमी का संकेत दे सकता है।

कैसे काम करता है — आसान शब्दों में

हाइपरइमेज कैमरा अलग-अलग तरंगदैर्घ्यों (wavelengths) पर प्रकाश को बांटकर हर बिंदु का स्पेक्ट्रल सिग्नेचर बनाता है। हर मटेरियल की अपनी एक खास स्पेक्ट्रल पहचान होती है — जैसे पानी, रेत, पत्ते अलग- अलग तरंगों पर अलग प्रतिक्रिया देते हैं। कैमरा इन बैंड्स को अलग-अलग चैनल्स में रिकॉर्ड करके एक 'स्पेक्ट्रल क्यूब' बनाता है। फिर सॉफ्टवेयर से आप उस क्यूब में से सटीक जानकारी निकाल सकते हैं।

खरीदते वक्त क्या देखें — प्रैक्टिकल चेकलिस्ट

सबसे पहले तय करें आपको किस काम के लिए चाहिए — खेती, सर्वे, रिसर्च या सुरक्षा। उसके बाद ये पॉइंट्स चेक करें:

1) स्पेक्ट्रल रेंज और रिज़ॉल्यूशन: विज़िबल (400–700nm), NIR (700–1000nm) या SWIR (1000–2500nm) चाहिये? जितनी बैंड्स और जितना फाइन स्पेक्ट्रल रिज़ॉल्यूशन (nm में) उतना बेहतर।

2) स्पेशल रिज़ॉल्यूशन (पिक्सल साइज): जमीन पर जितनी छोटी डिटेल चाहिए, वही पिक्सल रिज़ॉल्यूशन चुनें। ड्रोन पर ऊँचाई बढ़ेगी तो पिक्सल बड़ा होगा — इसे ध्यान में रखें।

3) फ्रेम रेट और शटर टाइप: मूविंग सब्जेक्ट या ड्रोन फ्लाइट के लिए हाई फ्रेम रेट उपयोगी है। प्लेस-आधारित सर्वे के लिए कम फ्रेम रेट चलता है।

4) कैलिब्रेशन और सॉफ्टवेयर सपोर्ट: स्पेक्ट्रल डेटा ठीक से कैलिब्रेट होना चाहिए। अच्छा प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर और बैकअप टूल मिलना जरूरी है।

5) पावर, स्टोरेज और कनेक्टिविटी: लंबी फ्लाइट्स के लिए बैटरी और बड़े स्टोरेज की ज़रूरत होगी। USB/ETHERNET/Wi‑Fi की सुविधा चेक करें।

6) वजन और इंटरफेस: ड्रोन पर लगाने वाले यूनिट्स हल्के और ड्रोन-फ्रेंडली होने चाहिए। कैमरा का माउंटिंग और कैमरा-ड्रोन इंटरफेस कम्पैटिबल हो यह देख लें।

एक छोटा सुझाव: अगर शुरुआत कर रहे हैं तो पहले मल्टीस्पेक्ट्रल मॉडल से शुरू करें, फिर जरूरत बढ़ने पर हाइपरस्पेक्ट्रल पर जाएं। प्रोजेक्ट-आधारित खरीद से बचें — भारी निवेश से पहले फील्ड ट्रायल कर लें।

अंत में, टेक सपोर्ट और वारंटी पर ध्यान दें। डेटा प्रोसेसिंग में आपको शुरुआती समय में मदद चाहिए होती है — विक्रेता की सर्विस अच्छी हो तो काम आसान रहता है। उम्मीद है ये गाइड आपको हाइपरइमेज कैमरा चुनने और इस्तेमाल करने में सीधा और काम का रास्ता दिखायेगा।

रियलमी 13 प्रो और रियलमी 13 प्रो+: हाइपरइमेज कैमरे और स्नैपड्रैगन 7S जेन 2 के साथ लॉन्च
तकनीकी

रियलमी 13 प्रो और रियलमी 13 प्रो+: हाइपरइमेज कैमरे और स्नैपड्रैगन 7S जेन 2 के साथ लॉन्च

रियलमी ने रियलमी 13 प्रो और रियलमी 13 प्रो+ को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया है। ये स्मार्टफोन्स हाइपरइमेज कैमरों और स्नैपड्रैगन 7S जेन 2 चिपसेट के साथ आते हैं। दोनों फोन्स में 6.7 इंच का AMOLED डिस्प्ले है और ये 5G कनेक्टिविटी सपोर्ट करते हैं। इनकी बैटरी 5000mAh की है और फास्ट चार्जिंग की सुविधा है।