IRCTC: बच्चों के टिकट पर नए नियम, जानें कब लगेगा आधा या पूरा किराया

समामचार IRCTC: बच्चों के टिकट पर नए नियम, जानें कब लगेगा आधा या पूरा किराया

क्या आप भी अगली छुट्टियों में परिवार के साथ रेल यात्रा की योजना बना रहे हैं? अगर हाँ, तो एक बात का खास ध्यान रखें। भारतीय रेलवे और IRCTC ने बच्चों के लिए टिकट किराये के नियमों को फिर से स्पष्ट किया है। गलत जानकारी या लापरवाही आपको भारी ज़रूरत पड़ सकती है। यहाँ सवाल यह नहीं है कि टिकट कैसे खरीदें, बल्कि यह है कि आपका बच्चा किस श्रेणी में आता है और उसे अलग सीट चाहिए या नहीं।

अक्सर यात्री मान लेते हैं कि छोटे बच्चे मुफ्त में यात्रा करते हैं, लेकिन नियम थोड़े पेचीदे हैं। विशेषकर 5 से 12 साल की उम्र के बच्चों के मामले में, आपका चुनाव (सीट चाहिए या नहीं) ही तय करेगा कि आपको आधा किराया देना है या पूरा। आइए, इन नियमों को सरल भाषा में समझते हैं ताकि यात्रा के दौरान टीटीई (ट्रेन टिकट एग्जामिनर) से कोई झंझट न हो।

उम्र के हिसाब से किराया: एक सरल गाइड

रेलवे के नियम बच्चों की उम्र के आधार पर तीन मुख्य श्रेणियों में बंटते हैं। सबसे पहले, 0 से 4 वर्ष की उम्र के बच्चों की बात करें। इस श्रेणी के बच्चे बिना किसी टिकट के यात्रा कर सकते हैं, बशर्ते उनके लिए अलग सीट या बेथ न मांगा गया हो। वे माता-पिता की गोद में या पास बैठ सकते हैं। हालाँकि, यदि अभिभावक चाहते हैं कि 4 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए भी अलग सीट बुक की जाए, तो उन्हें 'आधा टिकट शुल्क' (Child Concession Fare) देना होगा।

अब बात आती है 5 से 12 वर्ष की उम्र की। यह वह क्षेत्र है जहाँ सबसे अधिक भ्रम रहता है। IRCTC की आधिकारिक गाइडलाइन के अनुसार, इस उम्र के बच्चों के लिए दो विकल्प उपलब्ध हैं:

  • विकल्प 1 (आधा किराया): यदि बच्चे के लिए अलग सीट या बेथ नहीं चाहिए (No Seat/No Berth), तो केवल आधा किराया देना होता है। बच्चा यात्री के साथ बैठेगा।
  • विकल्प 2 (पूरा किराया): यदि बच्चे के लिए अलग सीट या बेथ बुक करना है, तो वयस्क किराया (Full Adult Fare) लागू होता है। यानी, छूट समाप्त हो जाती है।

और फिर है 13 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चे। रेलवे के नियमों के अनुसार, 13 साल पूरी होने के बाद बच्चे को वयस्क यात्री माना जाता है। ऐसे में, चाहे वह अकेला हो या परिवार के साथ, उसके लिए हमेशा पूरा वयस्क किराया देना अनिवार्य है। कोई छूट नहीं मिलती।

बुकिंग करते समय क्या ध्यान रखें?

जब आप IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉग इन करते हैं, तो 'Passenger Details' वाले पेज पर सावधानी बरतें। हर यात्री के लिए सही 'Passenger Type' चुनना ज़रूरी है।

यदि बच्चा 5 साल से कम है और आपको अलग सीट नहीं चाहिए, तो 'Child (No Seat/Berth)' विकल्प चुनें। 5 से 12 साल के बीच के बच्चे के लिए, आपकी आवश्यकता के अनुसार 'Child (No Seat/Berth)' या 'Child (Seat/Berth Required)' का चयन करें। याद रखें, जब आप 'Yes' (सीट चाहिए) पर क्लिक करते हैं, तो सिस्टम स्वचालित रूप से पूरा किराया जोड़ देगा। वहीं, 'No' पर क्लिक करने पर आधा किराया लागू होगा।

एक महत्वपूर्ण बात: यात्रा की तारीख के अनुसार बच्चे की सही उम्र दर्ज करें। कई बार लोग वर्तमान उम्र भर देते हैं, लेकिन यदि यात्रा कुछ महीने बाद है और उस दौरान बच्चा 5 या 13 साल का हो जाता है, तो नियम बदल जाएंगे। इसलिए, यात्रा के दिन की उम्र को ध्यान में रखकर ही टिकट बुक करें।

यात्रा के दौरान आयु प्रमाण पत्र क्यों ज़रूरी है?

टिकट खरीदने के बाद काम खत्म नहीं होता। यात्रा के दौरान, टीटीई (Train Ticket Examiner) द्वारा यात्रियों की जांच की जाती है। यदि किसी बच्चे की उम्र संदिग्ध लगती है, तो टीटीई आयु प्रमाण पत्र मांग सकता है।

NDTV और अन्य विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, "अगर आपके बच्चे की उम्र 5 साल से ज्यादा है और उसके बिना टिकट के यात्रा करते हुए पकड़े जाते हैं, तो आपको जुर्माना देना पड़ेगा।" इसी प्रकार, यदि बच्चा 4 साल से कम है लेकिन अलग सीट पर बैठा है, तो भी प्रमाण पत्र दिखाना पड़ सकता है।

अभिभावकों को अपने साथ बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) या स्कूल की पहचान पत्रिका जैसे दस्तावेज़ अवश्य रखने चाहिए। यह न केवल जुर्माने से बचाता है, बल्कि यात्रा को सुचारू बनाए रखता है। बिना प्रमाण पत्र के, टीटीई बच्चे की उम्र को अधिक मानकर पूरा किराया या जुर्माना वसूल सकता है।

भविष्य के लिए क्या देखें?

भारतीय रेलवे लगातार यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नियमों में बदलाव कर रहा है। अब अभिभावक खुद तय कर सकते हैं कि उन्हें बच्चे के लिए सीट चाहिए या नहीं, जिससे लचीलापन बढ़ा है। हालाँकि, नियमों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की जाती है।

अगली बार जब आप ट्रेन बुकिंग करें, तो रुकिए और बच्चे की उम्र की पुष्टि कर लीजिए। थोड़ी सी सावधानी आपको असुविधा और अतिरिक्त खर्च से बचा सकती है। याद रखें, नियम सबके लिए समान हैं, और उनका पालन करना हर यात्री की जिम्मेदारी है।

Frequently Asked Questions

5 से 12 साल के बच्चे के लिए आधा किराया कब लगता है?

5 से 12 साल के बच्चे के लिए तभी आधा किराया लगता है जब उनके लिए अलग सीट या बेथ बुक न किया गया हो। यदि आप 'No Seat/No Berth' विकल्प चुनते हैं, तो आधा किराया देना होता है। लेकिन यदि अलग सीट चाहिए, तो पूरा वयस्क किराया देना पड़ता है।

4 साल से कम उम्र के बच्चे के लिए टिकट जरूरी है?

नहीं, 4 साल से कम उम्र के बच्चे बिना टिकट के मुफ्त यात्रा कर सकते हैं, बशर्ते उनके लिए अलग सीट न मांगी गई हो। यदि अलग सीट चाहिए, तो आधा टिकट शुल्क देना होगा।

यात्रा के दौरान आयु प्रमाण पत्र नहीं होने पर क्या होगा?

यदि टीटीई आयु प्रमाण पत्र मांगे और आप उसे न दिखा सकें, तो वे बच्चे की उम्र को अधिक मान सकते हैं। इस स्थिति में, आपको पूरा किराया या जुर्माना देना पड़ सकता है, खासकर यदि बच्चा 5 साल से अधिक दिख रहा हो।

13 साल के बच्चे के लिए कोई छूट है?

नहीं, 13 वर्ष या उससे अधिक उम्र के सभी यात्रियों को वयस्क माना जाता है। इनके लिए कोई छूट नहीं होती और हमेशा पूरा वयस्क किराया देना अनिवार्य होता है।

IRCTC पर बच्चे की उम्र कैसे दर्ज करें?

बुकिंग करते समय, यात्रा की तारीख के अनुसार बच्चे की सही उम्र दर्ज करें। 'Passenger Type' में सही विकल्प चुनें और जन्म तिथि का ध्यान रखें ताकि किराया सही गणना हो सके।

11 टिप्पणि

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    Anant Kamat

    जून 4, 2026 AT 17:25

    सच कहूँ तो यह नियम काफी स्पष्ट है, बस हमें ध्यान रखना होगा। मैं अक्सर देखा करता हूँ कि लोग आखिरी पल में ही टिकट बुक करते हैं और फिर उम्र की गड़बड़ी हो जाती है। थोड़ा सावधानी से काम लेंगे तो कोई दिक्कत नहीं आएगी।

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    Indrani Dhar

    जून 6, 2026 AT 10:07

    ये सब दिखावा है असल मंे रेलवे के सिस्टम मे खामीयन भरी हुई हे जिनको कवर करने के लिए ऐसे नियम बनाए जाते हे ताकि आम आदमी को गुमराह किया जा सके और वे अधिक पैसा चुकाएं
    आपको लगता है कि ये सिर्फ नियम है? नहीं ये एक साजिश है आपकी जेब खाली करने की। हर बार जब आप टिकट काटा जाता है तो सरकार की नजर आप पर होती है। आपको अपनी पहचान पत्रिका साथ रखनी चाहिए वरना TTE आपसे कुछ भी कर सकता है जो उसकी मर्जी हो। मुझे विश्वास नहीं होता कि ये प्रक्रिया निष्पक्ष है।

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    Raja Meena

    जून 7, 2026 AT 20:05

    नियमों का पालन करना नागरिकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। अगर आप छूट का दुरुपयोग करते हैं तो इसका मतलब है कि आप समाज के अन्य सदस्यों को नुकसान पहुँचा रहे हैं। ईमानदारी से यात्रा करें और जरूरत से ज्यादा छूट लेने की कोशिश न करें।

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    Gaurav sharma

    जून 8, 2026 AT 12:23

    अरे भाई, तुम लोग इतना सोच क्यों रहे हो? बस एक बात समझो - अगर बच्चे को अलग सीट चाहिए तो पूरा पैसा दो, वरना आधा। यही तो है जीवन की वास्तविकता। लोग हमेशा कम पैसे में ज्यादा सुविधा चाहते हैं, यह मानवीय स्वभाव है लेकिन रेलवे अब इससे फिसल नहीं रही।

    मुझे लगता है कि इसमें कोई राजनीति नहीं है, बस व्यवस्था है। अगर तुम्हारा बच्चा 5 साल का है और वह शोर मचा रहा है, तो उसे अलग सीट मिलनी चाहिए ताकि दूसरे यात्री परेशान न हों। इसलिए पूरा किराया देना ही बेहतर विकल्प है।

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    Megha Khairnar

    जून 10, 2026 AT 02:14

    हम सभी को इन बदलावों को स्वीकार करना चाहिए क्योंकि यह यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने में मदद करता है। संस्कृति और नियम दोनों का सम्मान करना आवश्यक है।

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    Twinkle Vijaywargiya

    जून 10, 2026 AT 22:46

    हाँ, यह बहुत अच्छा जानकारीपूर्ण पोस्ट था; मुझे लगता है कि हम सभी को इस पर विचार करना चाहिए! विशेष रूप से उन माता-पिता के लिए जो पहली बार यात्रा कर रहे हैं, यह मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    क्या आप जानते हैं कि कई बार लोग भूल जाते हैं कि यात्रा की तारीख के अनुसार उम्र देखनी होती है? यह एक बहुत ही सूक्ष्म बिंदु है जिस पर ध्यान देना चाहिए।

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    Swetha Sivakumar

    जून 12, 2026 AT 16:12

    मैंने हाल ही में अपनी यात्रा के दौरान यह अनुभव किया था। मेरे पास बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र था, इसलिए कोई समस्या नहीं आई। हमेशा दस्तावेज़ अपने पास रखें।

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    diksha gupta

    जून 12, 2026 AT 21:08

    यह बहुत उपयोगी जानकारी है! मुझे खुशी है कि रेलवे स्पष्टता ला रहा है।

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    Sai Krishna Manduva

    जून 13, 2026 AT 09:44

    वास्तव में, क्या यह नियम न्यायसंगत है? एक तरफ कहा जाता है कि बच्चों को छूट मिलनी चाहिए, और दूसरी तरफ उन्हें वयस्क के रूप में माना जाता है यदि वे अलग बैठते हैं। यह द्वंद्व दर्शाता है कि कैसे समाज बचपन और वयस्कता की परिभाषाओं को लेकर भ्रमित है। शायद हमें उम्र के आधार पर नहीं, बल्कि विकास के स्तर के आधार पर नियम बनाने चाहिए।

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    Siddharth SRS

    जून 13, 2026 AT 14:45

    यदि हम गहनता से विश्लेषण करें, तो यह स्पष्ट होता है कि रेलवे प्रशासन ने एक कठोर दृष्टिकोण अपनाया है, जिसका उद्देश्य आय बढ़ाना है, न कि यात्रियों की सुविधा।

    ऐतिहासिक रूप से, भारतीय रेलवे हमेशा से ही नियमों में लचीलापन दिखाता रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में यह रुख बदल गया है। यह परिवर्तन चिंताजनक है, क्योंकि यह छोटे परिवारों के लिए आर्थिक बोझ बन सकता है। जब तक कि एक बच्चा पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से यात्रा नहीं करता, उसे वयस्क किराया देना उचित नहीं लगता। हालांकि, नियमों का पालन अनिवार्य है, चाहे हम सहमत हों या न हों।

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    Anoop Sherlekar

    जून 13, 2026 AT 18:57

    बहुत बढ़िया पोस्ट! 😊 अब सब कुछ स्पष्ट है। यात्रा से पहले जरूर चेक कर लें। शुभ यात्रा! 🚂✨

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